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उक्रांद नेता सुनील ध्यानी ने दिया त्यागपत्र

देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल के नेता और संस्थापक सदस्य सुनील ध्यानी ने दल को अलविदा कह दिया है। उनके अचानक त्यागपत्र देने से दल से जुड़े कई नेता सकते में हैं। उन्होंने अपना त्याग पत्र दल के केंद्रीय अध्यक्ष व दल के वरिष्ठ नेताओं को भेज दिया है। ध्यानी ने क्षेत्रीय राजनीति पाठ सिखाने वाले, राज्य के चिंतक व अपने राजनितिक गुरु स्व विपिन चंद्र त्रिपाठी की 17 वीं पुण्यतिथि पर दल के कार्यालय 10 कचहरी रोड देहरादून में उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने उक्रांद के समस्त पदों एवं प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। उन्होंने केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। त्याग पत्र की प्रतिलिपि दल के संरक्षक मंडल के दिवाकर भट्ट , त्रिवेंद्र सिंह पंवार, बी डी रतूड़ी , डॉ नारायण सिंह जंतवाल और पुष्पेंश त्रिपाठी को भी भेज दिया है। उन्होंने त्याग पत्र देने के बाद कहा कि उक्रांद मेरा मातृ संगठन रहा, और इससे मैंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व की गैर राजनैतिक रवैये एवं सोच, गलत फ़ैसले व दूर दृष्टि के न होने के कारण दल से अलग होने का फैसला लिया है और त्यागपत्र दिया है। उन्होंने कहा कि दल में नेतृत्व का अपना अहम, अपने वर्चस्व की लड़ाई के कारण आज राज्य का नियता वाला उक्रांद नेपथ्य में जा चुका हैं, जिसका भविष्य अंधकारमय है। दल के काडर के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व विश्वासघात कर रहा है। ध्यानी ने कहा कि दल में पदों पर बिना सोच के लोगों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिनकी योग्यता उन पदों पर बैठने लायक नहीं है। योग्य और दक्षता वाले लोगों को नेतृत्व द्वारा अनदेखा किया जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व के गलत निर्णय दल को गर्त में ले जा रही हैं। गुटबाजी, क्षेत्रवाद उक्रांद के भविष्य को चौपट कर रहा हैं। कर्मठ, योग्यता वाले व्यक्तित्व की उपेक्षा दल के भीतर हमेशा से होता रहा जिसके चलते सभी लोग दल छोड़कर चले गये और इसके लिए दल का नेतृत्व पूर्णतः जिम्मेदार हैं | ऐसे में मैं कार्याप्रणाली व शैली में घुटन महसूस कर रहा हूं। जिसके चलते मैंने दल से त्यागपत्र दिया है।

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