क्राइम

गाजीपुर में निवेश के नाम पर 400 करोड़ की ठगी का आरोप, हजारों लोगों की जमा पूंजी फंसी

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में निवेश पर भारी मुनाफा देने का झांसा देकर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। अंजली फाउंडेशन से जुड़े इस मामले में करीब 3,500 निवेशकों के लगभग 400 करोड़ रुपये फंसने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि संस्था की ओर से हर महीने 18.5 प्रतिशत ब्याज देने का लालच दिया गया था। अधिक कमाई की उम्मीद में लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत तक निवेश कर दी।

बताया जा रहा है कि वाराणसी निवासी संतोष कुमार यादव ने गाजीपुर जिले के गाजीपुर शहर, मुहम्मदाबाद, बरेसर समेत कई इलाकों में शाखाएं खोल रखी थीं। निवेशकों के अनुसार, उन्हें एक लाख रुपये जमा करने पर हर महीने 18,500 रुपये ब्याज देने का भरोसा दिया जाता था। शुरुआत में कुछ समय तक ब्याज मिलने से लोगों का विश्वास बढ़ा और कई अन्य लोग भी इस योजना में पैसा लगाने लगे।

मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिक मुनाफे की उम्मीद में कई लोगों ने अपनी जरूरी बचत भी लगा दी। कुछ निवेशकों ने 20 लाख से लेकर 52 लाख रुपये तक जमा किए। आरोप है कि किसी ने बेटी की शादी के लिए रखी रकम निवेश कर दी, तो किसी ने गहने और खेत बेचकर पैसा जुटाया।

लोगों को उम्मीद थी कि निवेश पर मिलने वाले ब्याज से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और भविष्य की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। लेकिन अब बड़ी रकम फंसने के कारण कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

निवेशकों का आरोप है कि शुरुआत में संतोष कुमार यादव नियमित रूप से ब्याज का भुगतान करता रहा। इससे लोगों का भरोसा बना रहा, लेकिन पिछले पांच महीनों से भुगतान बंद हो गया। इसके बाद संबंधित कार्यालय भी बंद मिले और आरोपी के फरार होने की बात सामने आई। इस मामले में जिले में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।

लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलने पर निवेशकों ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान संतोष कुमार यादव और उसके साथी रतन के बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित रामदयालु-भिखनपुरा इलाके में होने की जानकारी मिली।

जानकारी के मुताबिक, निवेशक दोनों को पकड़कर बरेसर थाने ले आए। रविवार रात बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंचे और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस आरोपी को सदर कोतवाली ले आई। इसकी सूचना मिलने पर वहां भी सैकड़ों निवेशक जुट गए और कार्रवाई की मांग करने लगे।

निवेशकों का कहना है कि उन्होंने आरोपी के मुजफ्फरपुर में छिपे होने की सूचना पुलिस को पहले भी दी थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर में आरोपी ने अपहरण किए जाने का आरोप भी लगाया था। इस पहलू समेत पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी है।

इस मामले में अब निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता अपनी जमा पूंजी वापस पाने की है। जिन लोगों ने शादी, खेती और परिवार की अन्य जरूरतों के लिए पैसा जमा किया था, वे आर्थिक नुकसान की आशंका से परेशान हैं।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों, निवेश की कुल राशि, संबंधित संस्था की भूमिका और धन के लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों के दावों की आधिकारिक पुष्टि और रकम की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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