कढ़ी-चावल की रेहड़ी से निवेश के करोड़ों के नेटवर्क तक, पंचकूला में 8 करोड़ से ज्यादा की ठगी की जांच
पंचकूला। ऑनलाइन निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये जुटाने का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम पुलिस की जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के निवेश घोटाले का खुलासा होने का दावा किया गया है। मामले में कढ़ी-चावल की रेहड़ी लगाने वाले राजेश उर्फ नाना की भूमिका सामने आई है।
पुलिस की जांच के मुताबिक, राजेश को उसके परिचित प्रमोद कंबोज ने कथित तौर पर ब्लूम नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा था। शुरुआत में राजेश ने करीब 7,500 रुपये लगाए। बाद में यह प्लेटफॉर्म बंद हो गया तो उसने दूसरी निवेश योजना में करीब दो लाख रुपये लगाए। इसके बाद वह कथित तौर पर अन्य लोगों को योजना से जोड़ने लगा।
जांच में सामने आया है कि निवेशकों को जोड़ने के लिए चंडीगढ़, मोहाली समेत कई स्थानों पर बैठकें और सेमिनार आयोजित किए गए। नेटवर्क बढ़ने के साथ राजेश को कथित तौर पर कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट हेड की जिम्मेदारी भी दी गई।
पुलिस के अनुसार, निवेशकों के बीच भरोसा बनाने के लिए आरोपितों की कथित लग्जरी लाइफस्टाइल को भी सामने रखा जाता था। राजेश की ओर से दावा किया गया कि कंपनी ने उसे मर्सिडीज कार उपहार में दी और उसने कम समय में करीब दो करोड़ रुपये कमाए।
जांच के मुताबिक, शुरुआत में बाइक से आने वाले आरोपित बाद में महंगी कारों से कार्यक्रमों में पहुंचने लगे। इस तरह की जीवनशैली देखकर कई कारोबारी और शिक्षित लोग भी कथित निवेश योजनाओं में रकम लगाने के लिए तैयार हो गए।
जांच में कथित तौर पर कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और योजनाओं के नाम सामने आए हैं। इनमें ब्लूम ड्राइव, एलपीएनटी क्रिप्टोकरेंसी, एमएसवीपी (मेटा सायल वर्से प्लान) और सायल वर्से जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस को आशंका है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एप पर निवेश की रकम और संभावित रिटर्न के आंकड़ों में हेरफेर किया जाता था। आरोप है कि छह महीने में 30 लाख रुपये के निवेश को करीब 68 लाख रुपये तक बढ़ा हुआ दिखाया जाता था। इसके अलावा निवेशकों को दुबई में फ्लैट और प्लॉट दिलाने का लालच दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस कथित निवेश नेटवर्क, लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी जुटा रही है। पीड़ितों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए अदालत से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

